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मोहब्बत

जब इश्क़ हो हमसे दग़ा करना बेपनाह हमसे यूँ ना वफ़ा करना हम नहीं काबिल तेरी मोहब्बत के हक़ जता कर यूँ ना सफा करना हमसे ना हो पायेगा ये दोहरा इश्क़ मंजर के साये में हँस के जफ़ा करना  मेरी शरारतें पसंद करती हो तुम वफ़ा इल्म के दरमियाँ अदा करना हाँ इश्क़ की जगह तुम मुझसे दग़ा करना तेरे मुस्कुराने भर से जां निसार करना 

तुम्हें लिखें हुए

बहुत दिन हो गए है हमें तुम्हें लिखे हुए फिर ना जाने कब उठाएंगे पत्ते गिरे हुए मैं तुझ पर कुछ ना कुछ लिखूं बस लिखूं उठा लूँ लफ़्ज़ अपने जो है कबके गिरे हुए मैं जब भी देखूँ तो बस तुम्हें ही देखूँ हाँ देखूँ तुम्हें जैसे हाला के प्याले में गिरे हुए हो जाऊँ फ़ना मैं तेरे जुल्फों के साये में जागूं तो उठा लूँ जो है नजरों में गिरे हुए ये तेरा मेरे पास होने का अच्छा तराना है जैसे  तकाजे का मारा शख्स उठाता है सिक्के गिरे हुए 

जब गिर के संभला मैं

.Mn  . 4.5 .. N.m. 3 JAB GIR KAR SMBHLA MAIN 4bnmm.. Jane anjane me ho gya wo bawla na jane kese bhool gya wo apna hi rasta samjh nhi aata ki logo ko pyar hota hai to kyu hota hai B4     ee man (soul) kuch smjha ise ee hawayen kuch dikha ise jitni mohabba krta hai usse ......... kyu nhi krta apne aapse................????? wo kyu nhi smjti in jajbato ko kyuki pyar smja betha hai wo un bato ko ghbra -ghbra kar poncha tha tu uske paas fir kya ghabra ghabra kar nibhayega tu uska sath ee mere man (soul) samjha ise ...... ee nadiyan kuch dikha ise ...... jane anjane me tu khda ho gaya ek mod par fir dubara kese nikl payega tu usi mod par..... ???? ye tanha ......., tanha nhi________ wo ek padav hai | wo pyar.........., pyar nhi ________wo ek lagav hai  |  diya  tha tune use ek gulab......... uski ek muskan pane ko  de gayi saza wo tuje tadpane ko... ee mere yaro wo muskan , muskan nhi dillgi thi wo jane, ...

जाने दिल ये क्यों कहे रहा ...............

 जाने दिल ये क्यों कहे रहा ............... ना जाने आज दिल ये क्यों कहे रहा |   कि  नहीं रह सकता तुम्हारे बिना ||  खुले धागो के झमेले में उलझे है हम|  जैसे उजाले की दुनिया में खो गए है हम||  जिसकी ख़बर तुझको भी है | जिसकी ख़बर मुझको भी है || नहीं समझ पा रहे है हम|  जाने कोनसी है ये बात || जीवन के इस घुमावदार मोड़ पर  मिले है इस तरह | की कट  जाएगी ज़िंदगी हमारी एक अज़नबी बनकर||  होने को अज़नबी  है हम एक दूसरे  के लिए | लेकिन वो (सहेली ) हमेशा कहती है, फिर क्यों बेताब हो तुम एक दूसरे के लिए||  न वो समझ पा रही है ना में समझ पा रहा|  जाने किसी है ये अजीब दास्ताँ | मित्रो की नज़रो में भाभी हो तुम | भाइयो की नज़रो में तो भाभी हो तुम|  लेकिन  मेरी नज़रो में. , मेरी नज़रो में एक बहुत अच्छी दोस्त हो और हाँ .................. और भी बहुत कुछ||

तुझको आभार

 तुझको आभार  उम्र बीत गयी, तुझको अपना बनाते - बनाते  अधूरी रह गयी ये कहानी, तुझको बयां करते - करते  बालो संग मूंछ भी सफ़ेद हो गयी तेरी, यादो में लिखते - लिखते  भुलने लगा हूँ मैं, तुझको प्यार करते - करते  फिसल जाता हूँ मैं, रास्ते पर चलते - चलते  Life को जीना सीख गया हूँ, तेरे पीछे पड़ते - पड़ते तेरे सामने सब फ़ीके पड़ने लगे है ............. माशूकाओं का दिल जीतने लगा हूँ, तुमसे बात करते - करते  जिंदगी को समझ बैठा हूँ, तुझको समझते -समझते  नैनो से भरोसा उठ गया है, तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते  तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते....... तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते.......  तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते....... 

वाह क्या वफ़ा है

आँखों से आंखों को समझना एक कला है आंखो से आंखों को मिलाना एक खता है तेरी जुल्फो में मेरे ख़्वाब महकते है इमरोज़  हर मोड़ पर फिर एक मोहब्बत लापता है आइने में फिर एक हमशक्ल मिला हमको हर शक्ल का बहरूपिया है, वाह क्या वफ़ा है