Skip to main content

तुझको आभार



 तुझको आभार 



उम्र बीत गयी, तुझको अपना बनाते - बनाते 

अधूरी रह गयी ये कहानी, तुझको बयां करते - करते 
बालो संग मूंछ भी सफ़ेद हो गयी तेरी, यादो में लिखते - लिखते 
भुलने लगा हूँ मैं, तुझको प्यार करते - करते 
फिसल जाता हूँ मैं, रास्ते पर चलते - चलते 
Life को जीना सीख गया हूँ, तेरे पीछे पड़ते - पड़ते

तेरे सामने सब फ़ीके पड़ने लगे है .............

माशूकाओं का दिल जीतने लगा हूँ, तुमसे बात करते - करते 
जिंदगी को समझ बैठा हूँ, तुझको समझते -समझते 
नैनो से भरोसा उठ गया है, तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते 
तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते.......
तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते....... 
तुझसे नैना लड़ाते -लड़ाते....... 

Comments

Popular posts from this blog

इज़हार -ए -मोहब्बत

आँखों में कजरा बालों में गजरा हाय ये काली बिंदी वाला चेहरा तुम यूँ ना जुल्फें सवारों अब अब ये दिल मचल रहा है मेरा हाय ये बातें याद रहेगी हमको कानो में झुमका होगा नाम का मेरा हाँ थोडा अलग है मेरा तुम्हारा प्यार ये नजाकत भी करेगी अब इंतज़ार तेरा हाँ मैं सब कुछ छोड़ कर ये एलान करता हूँ ये इश्क़ दोस्ती, वफ़ा ही नहीं प्यार हूँ तेरा गौतम रहबर 

इश्क़ -ए-मंज़र 2

एक आ'शार अच्छा है, अल्फाज़ से गुफ़्तगू बेहद अच्छी है, मुलाक़ात से कश्मकश रंगीन फ़िजाओ के पैमाने में  दिललगी अच्छी होती नहीं, हिफाज़त से ना जाने मैं क्यों तुम्हें देखा करता हूँ ये शौक-ए-हया अच्छा है, वावस्ता से रहबर 

4

अक्सर आँखों से जुर्म लाजबाब होता है तिरे चेहरे पर इक पेशेवर नकाब होता है हम पड़े रहते थे आज से पहले मयखाने में अब लगने लगा है ये शराब हराम होता है मैंने चाह लिया था उसको होशो हवाश में लगने लगा था वो शख्श मेरा जनाब होता है भूल थी मेरी, जो किस्मत ठोकर खा गयी घूम फिर के फिर ये गम तेरे ही नाम होता है आज भी देता हूँ नसीहत जवाँ-ए-ख़ून को रहबर मोहब्बत करो पर जिसका हाजिर जबाब होता है गौतम रहबर ‌😁😊