जाने दिल ये क्यों कहे रहा ............... ना जाने आज दिल ये क्यों कहे रहा | कि नहीं रह सकता तुम्हारे बिना || खुले धागो के झमेले में उलझे है हम| जैसे उजाले की दुनिया में खो गए है हम|| जिसकी ख़बर तुझको भी है | जिसकी ख़बर मुझको भी है || नहीं समझ पा रहे है हम| जाने कोनसी है ये बात || जीवन के इस घुमावदार मोड़ पर मिले है इस तरह | की कट जाएगी ज़िंदगी हमारी एक अज़नबी बनकर|| होने को अज़नबी है हम एक दूसरे के लिए | लेकिन वो (सहेली ) हमेशा कहती है, फिर क्यों बेताब हो तुम एक दूसरे के लिए|| न वो समझ पा रही है ना में समझ पा रहा| जाने किसी है ये अजीब दास्ताँ | मित्रो की नज़रो में भाभी हो तुम | भाइयो की नज़रो में तो भाभी हो तुम| लेकिन मेरी नज़रो में. , मेरी नज़रो में एक बहुत अच्छी दोस्त हो और हाँ .................. और भी बहुत कुछ||