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परवीन किये हमको





खैरात मोहब्बत की फिर भी ना मिली हमको
सीरत ए गम ने मिजाज नमकीन दिए हमको

दुःख दर्द से तालुकात रखता है हर एक शायर
फिर उसने हर मसले से गमगीन किये हमको

आज की रात, चाँद मेरे दिल का यूँ पर्वाज है
उसने पहचाना मुझे मगर शाहीन किये हमको

देखी है हमने भी दुनियां ये इश्क़ मोहब्बत की
तकल्लुफ देकर मुस्कुरा के बे-दीन किये हमको

हम कोई बे-चारे नहीं है उन्स की जब्त में रहबर
जब चाह, चाह लिए वो, फिर गमगीन किये हमको

 गौतम रहबर 











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इश्क़ -ए-मंज़र 2

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4

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