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राजस्थानी बाला







इक खूबसूरत बाला है बालों का रंग काला 
अधरों पर एक अलग ही मुस्कान सी ज्वाला 

इन आँखों के दरमियाँ वो देखे और मुस्कुराये 
ये मेरा चित्त उसे देखके बस बावला होता जाये 

एक आभा जो दिनकर को मात देने में सक्षम है 
कानो की बाली, नाक-नथनी हरेक में वो दक्ष है 

स्वाभाव जैसा स्वाभिमानी का, जैसे ललाट तेज 
चारु चंचल चपल सरिता जैसे बाँधे अपने केश 

गौरी-पद्मिनी-गंवरी बाई और मीरा बाई, प्रतिरुप है 
राजपूताने के आँगन में फिर एक पलता प्रतिरुप है 

गाथा सुनो अब अगर तुम एक ही आर्यवर्त की 
कहानी सुनाऊँ या सुनाऊँ नामावली वीरों की 

यही धरा है राव जोधा, बीका के पुरुषार्थ की
यही माटी है हम्मीर, सूरजमल और प्रताप की 

देखो तुम उतर से दक्षिण, पूरव से पश्चिम 
सौराष्ट्र से दक्कन, कैलाश से मछलीपट्टम 

और देखो द्वीपो में उभरते उतखात को 
फिर देखो उसी ज्वालामुखी के उबाल को 

अब देखो तुम केसरिया संग जौहर को 
देखो बहिनों का पेड़ो के लिए त्याग को 

देखो तुम मुगलो के भीषण अत्याचार को
देखो मेवाड़ के  तुम उसी लाल प्रताप को 

देखो तुम मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर भी 
देखो तुम उसमे  कर रहे भोपा-पाल को

रहबर 








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अक्सर आँखों से जुर्म लाजबाब होता है तिरे चेहरे पर इक पेशेवर नकाब होता है हम पड़े रहते थे आज से पहले मयखाने में अब लगने लगा है ये शराब हराम होता है मैंने चाह लिया था उसको होशो हवाश में लगने लगा था वो शख्श मेरा जनाब होता है भूल थी मेरी, जो किस्मत ठोकर खा गयी घूम फिर के फिर ये गम तेरे ही नाम होता है आज भी देता हूँ नसीहत जवाँ-ए-ख़ून को रहबर मोहब्बत करो पर जिसका हाजिर जबाब होता है गौतम रहबर ‌😁😊

इज़हार -ए -मोहब्बत

आँखों में कजरा बालों में गजरा हाय ये काली बिंदी वाला चेहरा तुम यूँ ना जुल्फें सवारों अब अब ये दिल मचल रहा है मेरा हाय ये बातें याद रहेगी हमको कानो में झुमका होगा नाम का मेरा हाँ थोडा अलग है मेरा तुम्हारा प्यार ये नजाकत भी करेगी अब इंतज़ार तेरा हाँ मैं सब कुछ छोड़ कर ये एलान करता हूँ ये इश्क़ दोस्ती, वफ़ा ही नहीं प्यार हूँ तेरा गौतम रहबर 

परवीन किये हमको

खैरात मोहब्बत की फिर भी ना मिली हमको सीरत ए गम ने मिजाज नमकीन दिए हमको दुःख दर्द से तालुकात रखता है हर एक शायर फिर उसने हर मसले से गमगीन किये हमको आज की रात, चाँद मेरे दिल का यूँ पर्वाज है उसने पहचाना मुझे मगर शाहीन किये हमको देखी है हमने भी दुनियां ये इश्क़ मोहब्बत की तकल्लुफ देकर मुस्कुरा के बे-दीन किये हमको हम कोई बे-चारे नहीं है उन्स की जब्त में रहबर जब चाह, चाह लिए वो, फिर गमगीन किये हमको  गौतम रहबर