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Showing posts from January, 2024

ड़र लगता है

मेरे सनम मैं तुझ पर जिंदगी वार दूँ तू कहे तो अपना नाम तेरे संग जोड़ दूँ तेरी आँखों के हम है कातिल नजरों में तुझे बसा के मैं दुनिया छोड़ दूँ मेरे पास कुछ नहीं कहने को कुछ भी अल्फाज़ तेरे होठों से, नाम अपना जोड़ दूँ मैं तुम्हारे केशुओं में खोता रहा हूँ तू मुस्कुरा दे तो तेरे किस्से में जग से नाता तोड़ दूँ हाँ मोहब्बत पुरानी है मेरी, ये चेहरा रंग बदला है चेहरे की नजाकत पर लफ्ज़ो को जोड़ दूँ 

कैसे हो आप

अच्छा हाल जाना आपने बेसबब हाल पूछा आपने ये सर्द-हवाओं के पहलुओं में ओस समेटे जाना है आपने निकल रहा है मौसम अपने ढंग से रंगीन-फिजाओं को जाना आपने घूम आये आप अपने जर्फ़ के साथ रास्ते के मर्म को जाना आपने बस इसी अंदाजे-ए-बयां से अच्छा हूँ अच्छा लगा पूछ लिया आपने चमन गौतम